🇮🇳 गणतन्त्र दिवस का सन्देश 🇮🇳

 🌴 “तकबीर-ए-मुसलसल” 🌴

 

🇮🇳 गणतन्त्र दिवस का सन्देश 🇮🇳


26 जनवरी की तारीख हमें धर्मनिरपेक्ष संविधान के कार्यान्वयन की याद दिलाती है और साथ ही इस तथ्य की भी याद दिलाती है कि यह देश एक लोकतांत्रिक देश है, सभी को यहां रहने की, अपने धर्म का पालन करने की, किसी भी भाषा को बोलने की, किसी भी सभ्यता को अपनाने की पूरी स्वतंत्रता है। इस देश में एक सभ्यता या एक धर्म को बढ़ावा देना और सब पर थोपना असंवैधानिक है। अतीत में यदि हमने नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध किया है तो ऐसा इसलिए क्योंकि आपने धर्म के नाम पर इस क़ानून में भेदभाव किया है। हमारे देश का संविधान यह कहता है कि धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है, यदि कोई भेदभाव किया जाएगा तो यह इस देश की सच्ची भावना के विरुद्ध, देश के संविधान के विरुद्ध होगा। जो संविधान बनाया गया है वह स्वतंत्रता, समानता, सहानुभूति और एक दूसरे के साथ अच्छे संबंधों पर आधारित है और हमारे संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि हमारा संविधान स्वतंत्रता, समानता और करुणा पर आधारित है लेकिन इसके बावजूद हम देख रहे हैं कि सत्तर साल बीत जाने के बाद हम हसरत से गणतंत्र दिवस के इस शुभ अवसर पर यह बात कहने के लिए मजबूर हैं कि हमारे देश में लोकतंत्र की हत्या हो रही है और कोशिश की जा रही है कि इस देश पर किसी धर्म विशेष की छाप डाल दी जाए। याद रखियेगा कि यह इस देश की गंगा-जमनी सभ्यता के विरुद्ध है जिसके माध्यम से यह देश आगे बढ़ रहा है। हमारे लिए ख़ुशी की बात है कि हमारा देश ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं, हर कोई अपने तरीके से जीवन व्यतीत करता है, हर कोई अपने धर्म की चीज़ों का पालन करता है, कोई किसी के बारे में पीड़ादायक बात नहीं कहता, यह हमारे लिए ख़ुशी की बात है लेकिन पूरे देश में संप्रदायवादियों ने घृणा का विष घोला है हम मजबूर हैं यह बात कहने पर कि वे लोग इस देश को विनाश की ओर ले जा रहे हैं, जिस प्रकार के काले क़ानून हम पर थोपे जा रहे हैं वे संविधान के विरुद्ध हैं, ऐसे समय में जब देश पिछड़ रहा है, मंदी बढ़ रही है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, जीडीपी गिर रही है, आर्थिक संकट आ गया है और देश धीरे-धीरे पीछे की ओर जा रहा है। ऐसे समय मे किसानों के हितों के विरुद्ध क़ानून लागू करना और देश के एक बड़े हिस्से को प्रदर्शन के लिए मजबूर करना इस बात का संकेत देता है कि ग़ैर-मुद्दों को उन मुद्दों में बदल दिया जा रहा है जो मुद्दे नहीं हैं ताकि सत्ता में बैठे लोगों की ग़लतियों को छिपाया जा सके, याद रखिएगा कि भारत जैसा विशाल देश बड़े दिल वाले लोगों द्वारा चलाया जा सकता है, छोटे दिल वाले इस देश को नहीं चला सकते।


 ✍🏼 हज़रत मौलाना मुहम्मद उमरैन महफ़ूज़ रहमानी साहब दामत बरकातुहुम

(सचिव ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड)


🎁 प्रस्तुति: सोशल मीडिया डेस्क ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

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